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Poetry/Shayari

वापसी की भी एक सीमा होती है | Short motivational Story | Inspiration Story

By Ajay Patel 1 min read

वापसी की भी एक सीमा होती है


गुरु और शिष्य दोनों किसी कच्चे रास्ते से जा

रहे थे। रास्ते के बीच में एक छोटा सा पौधा

खड़ा था।

गुरु ने कहा "इसे उखाड दो।" शिष्य

ने पौधे कों उखाड दिया।

थोड़ा और आगे बढ़़ें

तो फिर रास्ते के बीच में पौधा खड़ा था।

यह पौधा थोड़ा सा बडा था। गरु ने कहा इसें

उखाड़ दो।

शिष्य ने अपनी पूरी ताकत लगाकर

पौधे को उखाड़ दिया।

थोड़ा और आगे बढे तो

एक पूरा बरगद का पेड़ खड़ा था गुरु ने कहा

इसे उखाड़

शिष्य बोला "आप कैसी बातें

करते हैं गुरुदेव ?

इसकी जडे बहुत गहरी है

इतना बड़ा पेड़ में कैसे उखाड़ पाऊंगा?


गुरु ने कहा "यही तो में तुम्हे सीखाना चाहता हूं।ं

समय रहते बुरी आदतों, बुरे कामों,बुरे लो्गों

से पीछा छुड़ा लेना चाहिए। अगर जड़ गहरी

हो गई तो फिर उनसे पीछा छुड़ाना नामुमकिन

है। वापसी की भी एक सीमा होती है।"



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